मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म है कि वह अपने कर्तव्यों को समझे और उन्हें निभाए।
स्त्री का जीवन तो बलिदान और त्याग के लिए ही बना है।
जिस घर में प्रेम नहीं, वहां सुख कैसे टिक सकता है?
दूसरों पर दोषारोपण करने से पहले अपने भीतर झाँकना चाहिए।
नारी के आँसू भी मोती होते हैं, पर उन्हें समझने वाला कोई नहीं।
अज्ञानता सबसे बड़ा अभिशाप है।
संसार में सबसे कठिन है अपने मन को समझाना।
मनुष्य अपने कर्मों से ही ऊँचा या नीचा बनता है।
जो बीत गया, उसे सोच-सोचकर जीवन नहीं जिया जाता।
शंका का विष सबसे पहले विश्वास को मारता है।
लज्जा स्त्री का सबसे बड़ा आभूषण है।
जिसे अपना समझा, वही पराया हो गया।